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Thursday, August 18, 2011
कुछ मुद्दे जिसपर गौर करे
पहला मुद्दा
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एक सैनिक
देश के लिए अपनी जान बिना शर्त दे देता है. यह भी नहीं सोचता की उसके बाद
उसके परिवार का क्या होगा. उसके शहीद होने पर १ लाख की आर्थिक मदद का
भरोसा दिलाती है सरकारी निति, पर सालों तक उस शहीद के घर वाले धक्के खाते
रहते है दफ्तरों के, सेना मुख्यालय और कमान तो तुरंत सभी कुछ निबटा देती
है पर, जब बात वो मदद देने की आती है तो उस शहीद की फाइल सरकारी दफ्तरों
की मेजों और अलमारियों में धुल और धक्के खाती है. वही अगर कोई आतंकी मारा
जाता है या पकड़ा जाता है सैनिक मुठभेड़ में तो उसकी गिरफ्तारी को सियासी
रंग दे कार वोट बटोरती है. साथ ही अगर आतंकी मरता है तो उलटे सेना के
सिपाही और अधिकारीयों को कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी और कोर्ट मार्शल तक झेलना
पड़ता है.
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दूसरा मुद्दा
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लाखों
टन अनाज सड़ता रहता है बारिश में, सरकार तब भी अपनी तिजोरी भरती है. गरीब
और कुपोषित लोग भुखमरी से मरते रहते है. अनाज और दो जून की रोटी तो दूर,
सर ढकने के लिए छत भी नहीं होता है उनके पास. सरकार अनाज तो सड़ा कर बर्बाद
कर सकती है पर, भूखों का पेट नहीं भर सकती. वही दूसरी तरफ कसाब और गुरु
जैसे आतंकी देश को आर्थिक, सामाजिक, मानसिक, और भावनात्मक हानी पहुंचा रहे
है और हमारी कर्तव्यहीन सरकार उन्हें प्रतिदिन पेट भर भोजन और सभी
सहुल्तों के साथ सुरक्षा प्रदान कर रही है.
______________
तीसरा मुद्दा
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गाँधी ने कहा था भारत गावों में बसता है, सरकार गाँव उजाड़ कर शहर पर शहर बसा रही है.
और
से बात सिर्फ शहर बसने तक ही सिमित नहीं है, इन शहरों को बसने के लिए ये
गाँव तो उजड़ते ही है, पर साथ ही उन परिवारों को बेघर और रोज़गारहीन कर देते
है जों उन गाँव में रहते है. अगर कोई इंसान उस गाँव में रसूखदार है और
सोने पे सुहागा अगर किसी पार्टी का प्रतिनिधि या मेम्बर है और भगवन न करे
किसी रूलिंग पार्टी का नेता है या किसी नेता का रिश्तेदार है तो पुरे गाँव
को दरकिनार कर सारा फायदा उस एक इंसान को पहुंचती है.
______________
चौथा मुद्दा
______________
स्कूल,
कॉलेज और युनिवस्ती के नाम पर, ये विदेशी शिक्षा और विदेशी organisation
जों भारत में अपने शैक्षणिक संस्थान खोलने के लाइसेंस और परमिट देते जा
रही है वही. भारतीय शिक्षा संस्थानों का स्तर निचा करते हुए, और standard
के नाम पर मोटी तगड़ी फीस वसूलते हुए, उन छात्रों को शिक्षा से सीधे सीधे
वंचित कर रही है जों की प्रतिभा रखते है पर केवल इस लिए नहीं पढ़ सकते की
वो उन संस्थानों की मोटी फीस नहीं चूका सकते. देश में शिक्षा लोन देने की
बात तो सरकार करती है, पर जब ऐसे छात्रों को शिक्षा लोन देने की बात आती
है तो हर बैंक कुछ न कुछ सिक्यूरिटी चाहता है. इसपर भी सरकार का ही
नियंत्रण है. कई विश्वविद्यालयों में आर्थिक और शैक्षणिक घोटालों और
शिक्षा के निम्न स्तर के चलते उनका वार्षिक परिणाम २३% से ३२% के बिच ही
बना हुआ है उन पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा. सरकार सिर्फ पैसे वसूलती है
और खामोश हो जाती है. आई . आई. एम् जैसे संस्थानों की फीस १६ लाख से २०
लाख के बिच है, इन छात्रों न फीस में छूट मिलती है न सरकारी सब्सिडी.
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पांचवा मुद्दा
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भारत
की शल्य चिकित्सा और आयुरवेदिक चिकित्सा अब पूरा विश्व अपना रहा है और
भारतीय डॉक्टर अपनी प्रतिभा से पुरे विश्व में अपना लोहा मनवा चुके है, पर
अपने देश में ही डॉक्टरों की कमी है, अस्पतालों की कमी है, बिस्तरों की
कमी है. AIIMS, MANIPAL, AMITY, LPU, BHU, BVP और JIPMER जैसे संस्थानों
से डॉक्टर तो खूब निकल रहे है पर उनपर सरकार ऐसा कोई भी कानून नहीं लगाती
की, MBBS की पढाई करने के तत्पश्चात जब वो उच्च शिक्षा के लिए चाहे कही भी
जाये, उनकी MBBS की डिग्री तभी मान्य होगी जब वो उच्च शिक्षा के पश्चात
देश में लौट कर देश में ही अपनी चिकित्सा सेवाएं दे. ५ साल की सेवा के
पश्चात वो कही भी जा कर अपनी सेवाएं दे सकते है. देश में न तो मेडिकल
कॉलेज बढ़ रहे है और न ही डॉक्टर. जों भी है वो उच्चकोटि की भारतीय शिक्षा
के बाद देश छोड़ कर विदेशों में जाकर रह रहे है.
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छठा मुद्दा
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सरकार
इंजिनियर भी खूब बना रही है, देश में करीब हर वर्ष ४ लाख इंजिनियर, स्नातक
होते है पर, केवल नौकरी के आभाव में और विदेशों की चकाचौंध में देश छोड़
रहे है. वही दूसरी तरफ देश में कई तकनीकी विभागों में कर्मचारी अपनी पेंशन
की उम्र में रिटायर हो रहे है पर, उनकी रिक्त जगह भरने के लिए सरकार के
पास वक्त नहीं है. यही हाल सेना और सुरक्षा विभागों का है. सेना में ही
करीब लगभग ७०,००० अफसर रैंक, ३,७५,००० अन्य रैंक रिक्त है. जिनको भरने के
लिए सरकार के पास वक्त नहीं है, हाँ पर घोटालों ले लिए सरकार सरकारी समय
के आलावा अतिरिक्त समय जरूर निकाल लेती है.
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सातवा मुद्दा
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भारत
देश की अर्थ व्यवस्था को सरकार पुरे विश्व में सबसे मजबूत बताती है, इसके
हमे भी किसी प्रकार का शक नहीं है, परन्तु सरकार ने अपनी विदेशी निवेश
निति की तहत विदेशी कम्पनियों की निवेश सीमा करीब ३०%, पुरे भारतीय शेयर
बाज़ार का निवेश अंश प्रदान किया है. जब जब किसी देश में आर्थिक संकट आता
है तो वो देश अपना पूरा विदेशी निवेश भारतीय बाज़ारों से खिंच लेता है,
देखते देखते अन्य देश भी वही करते है और उस कारण हमारी अर्थव्यवस्था
चरमराने लगती है, फिर भी सरकार झूठे आश्वाशन देती है और कहती है की हम हर
तरह से सक्षम है इस दबाव को सहने के लिए. जिसके कारण भारतीय निवेशक
आत्महत्या तक के कगार पर कई बार पहुँच चुके है.
डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया का सच
कुछ बुद्धिहीन लिखते है कि हिंदू शब्द की उत्पत्ति
१७ वीं शताब्दी में हुई है. उदहारण के रूप में नेहरू कि डिस्कवरी ऑफ़
इंडिया का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं. नेहरू की वह पुस्तक नेहरू की तरह
झूंठ का पुलिंदा है.
हिंदू शब्द भारतीय विद्दवानो के
अनुसार कम से कम ४००० वर्ष पुराना है. शब्द कल्पद्रुम : जो कि लगभग दूसरी
शताब्दी में रचित है, में मन्त्र है.............
"हीनं दुष्यति इतिहिंदू जाती विशेष:" (अर्थात हीन कर्म का त्याग करने वाले को हिंदू कहते है.)
इसी प्रकार अदभुत कोष में मन्त्र आता है ......
"हिंदू:
हिन्दुश्च प्रसिद्धौ दुशतानाम च विघर्षने". (अर्थात हिंदू और हिंदु दोनों
शब्द दुष्टों को नष्ट करने वाले अर्थ में प्रसिद्द है.)
वृद्ध स्म्रति (छठी शताब्दी)में मन्त्र है,...........................
"हिंसया दूयते यश्च सदाचरण तत्पर:
वेद्.........हिंदु मुख शब्द भाक्। "
अर्थात जो सदाचारी वैदिक मार्ग पर चलने वाला, हिंसा से दुख मानने वाला है, वह हिंदु है।
ब्रहस्पति आगम (समय ज्ञात नही) में श्लोक है,................................
"हिमालय समारभ्य यवाद इंदु सरोवं, तं देव निर्वितं देशम हिंदुस्थानम प्रच्क्षेत."
(अर्थात हिमालय पर्वत से लेकर इंदु(हिंद) महासागर तक देव पुरुषों द्बारा निर्मित इस छेत्र को हिन्दुस्थान कहते है.)
पारसी
समाज के एक अत्यन्त प्राचीन ग्रन्थ में लिखा है कि, "अक्नुम बिरह्मने
व्यास नाम आज हिंद आमद बस दाना कि काल चुना नस्त" (अर्थात व्यास नमक एक
ब्र्हामन हिंद से आया जिसके बराबर कोई अक्लमंद नही था.)
इस्लाम के
पैगेम्बर मोहम्मद साहब से भी १७०० वर्ष पुर्व लबि बिन अख्ताब बिना तुर्फा
नाम के एक कवि अरब में पैदा हुए, उन्होंने अपने एक ग्रन्थ में लिखा
है,............................
"अया मुबार्केल अरज यू शैये नोहा मिलन हिन्दे.
व अरादाक्ल्लाह मन्योंज्जेल जिकर्तुं..
(अर्थात हे हिंद कि पुन्य भूमि! तू धन्य है,क्योंकि ईश्वर ने अपने ज्ञान के लिए तुझे चुना है.)
१० वीं शताब्दी के महाकवि वेन .....अटल नगर अजमेर,अटल हिंदव अस्थानं.
महाकवि चन्द्र बरदाई....................जब हिंदू दल जोर छुए छूती मेरे धार भ्रम.
जैसे
हजारो तथ्य चीख-चीख कर कहते है की हिंदू शब्द हजारों-हजारों वर्ष पुराना
है. इन हजारों तथ्यों के अलावा भी लाखों तथ्य इस्लाम के लूटेरों ने
तक्षशिला व नालंदा जैसे विश्व -विद्यालयों को नष्ट करके समाप्त कर दिए.
इसलिए
मेरा आप सब से अनुरोध है कि किसी अध्यनहीन व बुद्धिहीन व्यक्ति की
ग़लत जानकारी को सच न माने. हिंदू धर्म की बुराई करो और अपने को हिंदू
कहो, ऐसा करने से कोई हिंदू नही बन जाता. जो लोग जवाहर लाल नेहरु को
इतिहासकार मानते हैं, उनकी बुद्धि पर तरस आता है. वह प्रसिद्ध, चतुर
राजनेता थे
युग परिवर्तन का भार युवाओं के कंधे पर
युग परिवर्तन का भार हमेशा से युवाओं के कंधे पर
रहा है. इस समय हमारा देश बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रहा है. एक तरफ
राष्ट्रविरोधी ताकते लगातार षड़यंत्र कर रही है दूसरी तरफ ये भ्रष्टाचारी
नेता देश की जड़ो को खोखला कर रहे है. देश का पैसा विदेशों में भेजा जा रहा
है और व्यक्तिगत फायदे के लिए देशहित को गिरवी रखा जा रहा है. दूसरी तरफ
अल्पसंख्यक आरंक्षण और सांप्रदायिक कानून के रूप में वोट बैंक पक्का करने
के चक्कर में एक भयानक खतरे को पैदा करने की कोशिश हो रही है. एक और
बिभाजन की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है. ऐसे समय में युवाओ का दायित्व है की
देश की रक्षा हेतु आगे बढकर इन देशद्रोहियों का भयानक विरोध करे. यही समय
की पुकार है. आपने भारत महान की रक्षा करो दोस्तों....
रहा है. इस समय हमारा देश बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रहा है. एक तरफ
राष्ट्रविरोधी ताकते लगातार षड़यंत्र कर रही है दूसरी तरफ ये भ्रष्टाचारी
नेता देश की जड़ो को खोखला कर रहे है. देश का पैसा विदेशों में भेजा जा रहा
है और व्यक्तिगत फायदे के लिए देशहित को गिरवी रखा जा रहा है. दूसरी तरफ
अल्पसंख्यक आरंक्षण और सांप्रदायिक कानून के रूप में वोट बैंक पक्का करने
के चक्कर में एक भयानक खतरे को पैदा करने की कोशिश हो रही है. एक और
बिभाजन की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है. ऐसे समय में युवाओ का दायित्व है की
देश की रक्षा हेतु आगे बढकर इन देशद्रोहियों का भयानक विरोध करे. यही समय
की पुकार है. आपने भारत महान की रक्षा करो दोस्तों....
अकारण बहस और कीचड़ उछालने से सदैव बचे
एक नेत्रहीन व्यक्ति था ,पर उसके पास गजब के कान और
नाक थे जिससे वो साधारण व्यक्तियों जैसा व्यवहार करता था | और लोग समझ भी
नहीं पाते की वो नेत्रहीन है और उसे ऐसा करते रहने में बहुत मजा आता था |
एक दिन उसका रेलवे स्टेशन जाना हुआ ,यहाँ भी वो बिना चश्मे पहने हाथ में
मोबाइल लिए गया... और वह घड़ी देखने और ट्रेन के लेट होने का दिखावा करते
हुए वही एक बैंच में बैठ गया तथा मोबाइल निकल के जोर - जोर से बात करने
लगा | उसके सीध में एक और आदमी उसके आने के पहले से बैठा था और वो भी
मोबाइल से बात कर रहा था , उसे नेत्रहीन व्यक्ति की हरकते अच्छी नहीं लगी
और वो नेत्रहीन व्यक्ति के पास आ कर बहस करने लगा ... कहने लगा की आप मेरा
मजाक उड़ा रहे है | नेत्रहीन व्यक्ति को अपनी चोरी पकड़े जाने का डर था
इसलिए वो सॉरी बोलने के बजाय तर्क-वितर्क करने लगा ....बात इतनी बड़ी की
दोनों के बीच हाथा-पाई की नोबत आ गई तो पुलिस ने बीच बचाव किया और दोनों
को गिरफ्तार कर लिया | जब पुलिस ने पूछ-ताछ की तो नेत्रहीन व्यक्ति ने
बताया की मैं नेत्रहीन हूँ...पुलिस वाले हैरान हो गये और दुसरे ने बताया
की मैंगूंगा हूँ और लोग के होंठ को पढ़ता हूँ | पुलिस वालो ने ये निष्कर्ष
निकला की लड़ाई की मुख्य वजह दोनों का असाधारण व्यवहार था , जिसके कारण वो
आपस में भीड़ गये .......और उन्होंने दोनों को चेतावनी देकर छोड़ दिया |
इसलिए कहते है अकारण बहस और कीचड़ उछालने से सदैव बचे क्योंकि कुछ छिटे आप
पर भी आ सकती है ....
नाक थे जिससे वो साधारण व्यक्तियों जैसा व्यवहार करता था | और लोग समझ भी
नहीं पाते की वो नेत्रहीन है और उसे ऐसा करते रहने में बहुत मजा आता था |
एक दिन उसका रेलवे स्टेशन जाना हुआ ,यहाँ भी वो बिना चश्मे पहने हाथ में
मोबाइल लिए गया... और वह घड़ी देखने और ट्रेन के लेट होने का दिखावा करते
हुए वही एक बैंच में बैठ गया तथा मोबाइल निकल के जोर - जोर से बात करने
लगा | उसके सीध में एक और आदमी उसके आने के पहले से बैठा था और वो भी
मोबाइल से बात कर रहा था , उसे नेत्रहीन व्यक्ति की हरकते अच्छी नहीं लगी
और वो नेत्रहीन व्यक्ति के पास आ कर बहस करने लगा ... कहने लगा की आप मेरा
मजाक उड़ा रहे है | नेत्रहीन व्यक्ति को अपनी चोरी पकड़े जाने का डर था
इसलिए वो सॉरी बोलने के बजाय तर्क-वितर्क करने लगा ....बात इतनी बड़ी की
दोनों के बीच हाथा-पाई की नोबत आ गई तो पुलिस ने बीच बचाव किया और दोनों
को गिरफ्तार कर लिया | जब पुलिस ने पूछ-ताछ की तो नेत्रहीन व्यक्ति ने
बताया की मैं नेत्रहीन हूँ...पुलिस वाले हैरान हो गये और दुसरे ने बताया
की मैंगूंगा हूँ और लोग के होंठ को पढ़ता हूँ | पुलिस वालो ने ये निष्कर्ष
निकला की लड़ाई की मुख्य वजह दोनों का असाधारण व्यवहार था , जिसके कारण वो
आपस में भीड़ गये .......और उन्होंने दोनों को चेतावनी देकर छोड़ दिया |
इसलिए कहते है अकारण बहस और कीचड़ उछालने से सदैव बचे क्योंकि कुछ छिटे आप
पर भी आ सकती है ....
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