ऐसी खतरनाक साजिश के निशाने पर चढ़े अन्ना को अहसास भी नहीं है कि वो कैसे जानलेवा हमले से घिरे हुए हैं. वो तो अपने मकसद के लिए यहाँ से वहा दिन रात एक किये हुए है क्योंकि इन चारों ही बार इन चारो ही जगहों पर अन्ना खतरे में थे. जानलेवा हमला होने ही वाला था और हमला करना था जैश-ए-मोहम्मद को. जैश के चार से छह आतंकवादी दो से तीन मोटरसाइकिल पर बैठ कर अन्ना पर गोली चलाने वाले थे.पर खुफिया ब्यूरो को चारों ही बार इसकी भनक पहले लग गई. इसके बाद महाराष्ट्र एटीएस और दिल्ली पुलिस की मदद से इन चारों हमलों को नाकाम बना दिया गया.
इसी लिए अन्ना का रूट बदला गया था. महाराष्ट्र सदन में सुरक्षा बढ़ाई गई थी. रालेग सिद्धि में उन्हें अचानक भीड़ से अलग किया गया और प्रेस क्लब में सादी वर्दी में सुरक्षाकर्मी तैनात किए हुए थे जिसे कोई उन्हें पहचान न सके .
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