कोई खास फर्क नहीं पडता
मुझे ऐसा लगता है कि अगर हम अनुशासित जीवनशैली अपनाते हैं तो मौसम का हमारी दिनचर्या पर कोई खास असर नहीं पडता। घडी की सुइयां तो हमेशा अपनी ही रफ्तार से चलती रहती हैं। यह बात अलग है कि सुबह देर से सूरज निकलता है और शाम को जल्दी डूब जाता है। इस लिहाज से मुझे अपनी दिनचर्या में थोडा-बहुत बदलाव जरूर लाना पडता है। मुझे सुबह पांच बजे उठकर मॉर्निग वॉक पर जाने की आदत है, पर सर्दी के मौसम में इस वक्त पूरी तरह अंधेरा रहता है। ऐसे में घर से बाहर नहीं जा सकती तो सुबह उठकर घर पर ही थोडी देर के लिए योगाभ्यास करती हूं। सुबह का वातावरण बिलकुल शांत रहता है। इसलिए पढने-लिखने का काम भी मैं इसी वक्त करना पसंद करती हूं। क्लासेज खत्म होने के बाद मैं शाम चार बजे तक घर पहुंच जाती हूं। इस मौसम में दिन भले ही छोटे हों, पर फायदा यह होता है कि शाम छह बजे के बाद से मुझे आराम से पढाई का टाइम मिल जाता है ....
हाँ अगर थोडा घरेलु हैं तो अपने और कामो को थोडा थोडा टाइम देकर घर के और कामो को भी निपटाया जा सकता है......
और सर्दियां तो आती जाती ही रहेंगी!

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