सरकार का पेट्रोल की कीमतों पर कोई कंट्रोल नहीं इसलिए इसके दाम दिनों दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। आम जनता बेहाल है। पर सुध लेने को कोई तैयार नहीं है। जिस हिसाब से पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं उससे लग रहा है कि वो दिन दूर नहीं जब एक लीटर पेट्रोल 90 रुपए में मिलेगा।
सरकार पेट्रोल के मूल्यों पर पिछले साल जून से ही अपना नियंत्रण हटा चुकी है। पेट्रोल के दाम बढ़ने का फैसला अब नफे-नुकसान की बाजार शक्तियों के हिसाब से होता है। हमारे यहां पेट्रोलियम पदार्थों के दाम सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय होते हैं क्योंकि देश में इनके मूल स्रोत कच्चे तेल की 78 फीसदी मांग आयात से पूरी की जाती है। हाल ही में कच्चे तेल के दाम 125 डॉलर प्रति लीटर तक पहुंच गए थे। जिसके बाद दाम 1 रुपए 80 पैसे बढ़ाए गए थे। अगर क्रूड ऑयल के दाम ऐसे की बेलगाम बढ़ते रहे तो पेट्रोल के दाम बढ़ना तय है।
पेट्रोल के अंतरराष्ट्रीय मूल्य के अलावा रुपए की विनिमय दर भी पेट्रोल कीमतों को खासा प्रभावित करती है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर पड़ गया है। लिहाजा, कंपनियों को नुकसान से उबारने के लिए पेट्रोल की कीमतों में वृद्घि करनी पड़ती है। रुपए के सस्ता और डॉलर के महंगा हो जाने से समान अंतरराष्ट्रीय मूल्य के बावजूद तेल कंपनियों की आयात लागत बढ़ जाती है। इसकी भरपाई के लिए निजी कंपनियों को दाम बढ़ाने पड़ते हैं।
पेट्रोल मूल्यों के निर्धारण में स्थानीय टैक्सों का भी असर पड़ता है। हाल ही में पेट्रोल के दामों में 1.82 रुपए की वृद्घि के बाद दिल्ली में पेट्रोल के दाम 68.64 रुपए हो गए हैं। दिल्ली में इस समय एक लीटर पेट्रोल पर 11.14 रुपए वैल्यू ऐडेड टैक्स (वैट) लग रहा है। राज्य सरकार चाहे तो इसे कम या ज्यादा करके पेट्रोल के दाम घटा या बढ़ा सकती है। वहीं इस समय मुंबई में एक लीटर पेट्रोल पर 14.71 वैट के बाद पेट्रोल की कीमत 73.81 रुपए है। इससे पहले दिल्ली में 1 जून 2010 को पेट्रोल के दाम 47.93 रुपए थे। उस समय प्रति लीटर पेट्रोल पर दिल्ली में 7.99 रुपए वैट था। वहीं मुंबई में उस समय पेट्रोल के दाम 11.33 रुपए वैट मिलाकर 52.20 रुपए थे।
ट्रांसपोर्टेशन और शोधन
पेट्रोल के ट्रांसपोर्टेशन और शोधन में आने वाले खर्चे का भी पेट्रो कीमतों पर असर पड़ता है। भारत में खाड़ी देशों से कच्चा तेल जल मार्ग के जरिए जहाजों से लाया जाता है। लाने में लगने वाले भाड़े का असर भी तेल की कीमतों पर पड़ता है। इसके बाद मुंबई और कुछ शहरों में इसका शोधन किया जाता है। शोधन के बाद यहां से ट्रेनों से तेल की विभिन्न शहरों में स्थित रिफाइनरियों में सप्लाई होती है। यहां से तेल को विभिन्न शहरों में टैंकरों के जरिए भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में आने वाले खर्चे का असर से भी तेल कीमतें प्रभावित होती हैं।
संतोष त्रिवेदी

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